Home उरई भूमि संरक्षण राष्ट्रीय जलागम जालौन द्वितीय में करोड़ों की हेराफेरी
उरई - January 13, 2019

भूमि संरक्षण राष्ट्रीय जलागम जालौन द्वितीय में करोड़ों की हेराफेरी

सत्येन्द्र सिंह राजावत
0 जांच में पुष्टि के बाद भी जिम्मेदारों पर कार्यवाही नहीं हुई
0 स्थलीय जांच में फर्जीबाड़े का जांच टीम ने किया था खुलासा
उरई (जालौन)। भूमि संरक्षण राष्ट्रीय जलागम जालौन द्वितीय कार्यालय द्वारा कराये जा रहे कार्यों विगत कई वर्षों से फर्जीबाड़े का जो खेल खेला जा रहा था वह स्थलीय जांच में खुलकर सामने आ गया। इसी के साथ करोड़ों रुपये का गोलमाल करने वाले जिम्मेदारों ने जहां कराये गये कार्यों के अभिलेख जांच टीम के सामने प्रस्तुत नहीं किये तो वहीं हेराफेरी करने वाले अपने बचाव में जुटे हुये बताये जा रहे हंै। ताज्जुब की बात तो यह है कि उक्त मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से लेकर जिलाधिकारी से भी की गयी जहां विगत तीन महीने से वित्तीय अनियमितताओं को अंजाम तक पहुंचाने वालों पर विभागीय कार्यवाही सुनिश्चित नहीं करायी जा सके।
बताया जाता है कि भूमि संरक्षण राष्ट्रीय जलागम जालौन द्वितीय कार्यालय में बृजेश कुमार के कार्यकाल में एनएमएसए योजना में करोड़ों रुपये की हेराफेरी को अंजाम तक पहुंचाया गया था। जिसकी पुष्टि स्वयं विभागीय अधिकारियों द्वारा स्थलीय जांच के दौरान अपनी आख्या में स्पष्ट की थी। जिसमंे संयुक्त कृषि निदेशक के पत्र संख्या 1576 दिनांक 8.9.17 व पत्र संख्या 1577 दिनांक 8.9.17 के द्वारा अभिलेख भूमि संरक्षण अधिकारी द्वारा अभिलेख उपलब्ध न कराने के संबंध में पत्र में पुष्टि की गयी व वित्तीय अनियमितता की बात भी स्वीकारी गयी थी। इतना ही नहीं उप कृषि निदेशक भूमि संरक्षण झांसी मंडल झांसी के पत्र संख्या 917-19 दिनांक 11.9.17 एवं 916 दिनांक 8.9.17 अभिलेख उपलब्ध न कराने के संबंध में व वित्तीय अनियमितताओं को सुधारने का समय देते हुये अभिलेख उपलब्ध कराने के निर्देश दिये गये थे। जिससे स्पष्ट होता है कि उक्त योजना में बड़े स्तर पर अभिलेखों में भी हेराफेरी हुई थी। इसीक्रम में पत्र संख्या 463 दिनांक 14.12.2018 के द्वारा स्वयं स्वीकार किया जा रहा है कि वर्ष 2015-16, 2017-18 में संचालित उक्त योजनाओं से संबंधित वित्तीय अभिलेख कार्यालय में नहीं है। वित्तीय अभिलेख कार्यालय में कराने के लिये सेवानिवृत्त एवं स्थानांतरित कर्मचारियों को अनावश्यक तरीके से पत्राचार करके अपने कार्यालय की बड़ी लापरवाही को छिपाने का प्रयास किया जा रहा है साथ ही केशबुक संबंधी गंभीर अनियमितता भूमि संरक्षण अधिकारी के पत्र से परिलक्षित हो रही है। बंधी इंसपेक्टर लक्ष्मीकांत त्रिपाठी के पत्र संख्या- दिनांक 8.5.2018 से स्पष्ट हो रहा है कि कार्यालय में चल रही खेत तालाब योजना में किसानों के खाते में प्रथम व द्वितीय किस्त डाली जाती थी लेकिन तीसरी किस्त अपने परिचित किसानों के खाते में डालकर अनुदान की धनराशि को हड़पकर उसका बंदरबांट किया जाता रहा। इतना ही नहीं अपर कृषि निदेशक के पत्र संख्या 150 ए दिनांक 10 फरवरी 2017 के द्वारा एनएमएसए परियोजना कुसमरा में निरीक्षण के दौरान लाखों रुपये की वित्तीय अनियमितता की बात तो स्वीकार की है लेकिन अधिकारियों द्वारा आज तक कोई कार्यवाही दोषियों के विरुद्ध शुरू नहीं की गयी। इससे स्पष्ट होता है कि उक्त वित्तीय अनियमितता में विभागीय अधिकारियों द्वारा जान बूझकर जांच नहीं की जा रही है। ताज्जुब की बात तो यह है कि भूमि संरक्षण अधिकारी बृजेश कुमार व उनके अधीनस्थ कर्मचारियों को खुले तौर पर बचाने का प्रयास किया जा रहा है। उधर सूत्रों की मानें तो उक्त वित्तीय अनियमतता/वित्तीय अभिलेखों में हेराफेरी, योजना में फर्जी बिल, बाउचर लगाकर सरकार को लाखों रुपये का चूना लगाने का काम किया गया जिसकी शिकायत मुख्यमंत्री उप्र सरकार के जन सुनवाई पोर्टल पर तीन माह पूर्व की गयी थी जो अभी लंबित चल रही है। इसीक्रम में एक जांच तीन माह पूर्व जिलाधिकारी जालौन से की गयी थी जो आज भी लंबित बतायी जा रही है।

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