Home जगम्मनपुर दानवीर कर्ण की स्मृतियां आज भी मौजूद है जगम्मनपुर समीपस्थ करण खेरा मंदिर पर
जगम्मनपुर - January 14, 2019

दानवीर कर्ण की स्मृतियां आज भी मौजूद है जगम्मनपुर समीपस्थ करण खेरा मंदिर पर

0 करण देवी की अध कटी मूर्ति उज्जैन के हरसिद्धि मंदिर में स्थापित
जगम्मनपुर (जालौन)। दानवीर कर्ण की स्मृतियां आज भी लोगों के लिए कौतूहल का विसय बनी हुई है यहां स्थापित करण देवी की ऐतिहासिक मूर्ति को राजा विक्रमादित्य ने राजा कर्ण की दान वीरता की खोज के दौरान खंडित कर दिया था। कर्णवती की स्थापित आदमकद मूर्ति का कमर के ऊपर का हिस्सा भी विक्रमादित्य ने काट दिया और उसके धड़ को उज्जैन में ले जाकर स्थापित कर दिया था। उज्जैन में कर्णवती की अधकटी मूर्ति को आज भी श्रद्धालु विक्रमादित्य की कुलदेवी के रूप में पूजते हैं। इस कुल देवी का आधा हिस्सा कमर से पैर तक आज भी जगम्मनपुर के पचनद क्षेत्र में विराजमान है जिसे लोग कर्णदेवी के रूप में पूजा जाता है कर्णावती की इस मूर्ति की कहानी शायद पर्यटन विभाग को जानकारी में नहीं है ओर नहीं इसके इतिहास को जानने की कोशिश की है सरकार को चाहिए कि वह इस पौराणिक क्षेत्र की ऐतिहासिकता को सर्वेक्षण कराकर इतिहास किदवंतियां हजारों वर्ष तक पुनर्जीवित रह सकती हैं। लेकिन इस संबंध में राजनीतिक दलों से लेकर सामाजिक संस्थाएं विकास ओर पर्यटन की बात तो करते हैं पर धरोहरों की संरक्षण की आवाज यदा कदा ही उठाई जाती है।
पचनद क्षेत्र जो 41 जोजन मे फैला हुआ है यहां पर न जाने कितनी पुरासंपदा है यह सब धीरे धीरे आँखों से ओझल हो रही है अभी बहुत कुछ विद्धमान है इसे बचाया जा सकता है देर की तो ये धरोहरें इतिहास के पन्नों में सिमिट कर रह जायेगी हमारे पास जो जानकारी है उसे हम प्रकाशित कर रहे है पर कई ऐसी धरोहरें है जो आज भी लोगो की नजरों से ओझल है इनको सामने लाने ओर उसके इतिहास की जानकारी देने की जिम्मेदारी आपकी है समाचार पत्र आपको मंच उपलब्ध करा रहा है आपके द्वारा कराई गई सामाग्री को उन हजारों पाठकों तक पहुंचायेंगे जो अभी तक अंजान है समाचार पत्र का अभियान बगैर आपके सार्थक नहीं हो सकता पचनद क्षेत्र की गरिमा वापस दिलाने ओर इसकी ऐतिहासिकता को बचाने के लिए आपको मुखर होना होगा तभी पचनद धाम अपनी पहचान कायम रख पायेगा

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