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प्रेम विवाह की समाज में स्वीकार्यता पहले भी कम थी और आज भी कम है* – डॉ कामिनी वर्मा

भारतीय परिवेश में प्रेम विवाह पर परिचर्चा में बेबाक बोले प्रतिभागी

वाराणसी – कन्हैया लाल स्मृति सभागार वाराणसी में नई सुबह संस्था द्वारा भारतीय परिवेश में प्रेम विवाह पर विशेषज्ञों की चर्चा का आयोजन किया गया जिसमें विभिन्न जिलों के मनोवैज्ञानिक, समाजशास्त्री, इतिहासकार , वकील , शिक्षक, प्रधानाचार्य , महिला आयोग की सदस्य, चिकित्सक,पत्रकार मनोचिकित्सक, नव युवक एवं युवतियां एवं विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भागवतजिन्होंने अपने विचार भारतीय समाज में बढ़ते प्रेम विवाह के प्रचलन के कारण एवं प्रभाव पर प्रस्तुत किया महिला आयोग की सदस्य डॉ मीना चौबे ने अपने विचार रखते हुए कहा कि प्रेम विवाह भारतीय संस्कृति में अपनी परंपराओं एवं सांस्कृतिक विरासत को ध्यान में रखते हुए करना चाहिए तथा प्रेम विवाह के बारे में युवा पीढ़ी अपनी शिक्षा पूर्ण करके व्यवसायिक रूप से स्थिर होने के बाद ही सोचे तभी प्रेम विवाह सफल होगा। केएनपीजी कॉलेज ज्ञानपुर भदोही के इतिहास विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर कामिनी वर्मा ने प्रेम विवाह के भारतीय परिपेक्ष में ऐतिहासिक स्थिति को स्पष्ट किया और उन्होंने कहा कि इतिहास में प्रेम विवाह के अनेक उदाहरण उपस्थित है प्रेम विवाह की समाज में स्वीकार्यता पहले भी कम थी और आज भी कम है ।
डॉक्टर संध्या ओझा एसोसिएट प्रोफेसर मनोविज्ञान विभाग अग्रसेन कन्या पीजी कॉलेज वाराणसी ने कहा कि अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने बच्चों को उचित परवरिश दे तथा उनके साथ प्रेम पूर्वक व्यवहार करें ताकि ऐसे विचार मन में आने पर बच्चे उनसे बेहिचक बता सके ताकि समय रहते हुए उन्हें उचित दिशा-निर्देश प्रदान कर सके ।
डॉक्टर आर ए जोसेफ संस्थापक अध्यक्ष विकलांग समाकलन संस्थान वाराणसी ने कई दिव्यांग जनों के सफल प्रेम विवाह का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रेम विवाह एक आदर्श स्थिति है यदि प्रेम निस्वार्थ भाव से किया गया हो तो निश्चय ही प्रेम विवाह सफल होता है । डॉक्टर अजय तिवारी संस्थापक अध्यक्ष नई सुबह ने कहा कि आजकल समाज में प्रेम विवाह के कारण अनेक नई तरह की समस्याएं आ रही हैं जिन पर बुद्धजीवियों द्वारा चर्चा किया जाना अति आवश्यक है इसी को ध्यान में रखकर ही संस्था ने आज इस विषय को चर्चा हेतु चुना है
डॉ मनोज कुमार तिवारी इस परिचर्चा कार्यक्रम के सचिव एवं मनोचिकित्सक ने कहा कि युवा पीढ़ी के प्रेम विवाह की ओर अधिक झुकाव के पीछे अनेक मनोवैज्ञानिक कारण है जिसमें एक प्रमुख कारण है उनके माता-पिता द्वारा उन्हें समुचित रूप से समुचित रूप से देखभाल एवं लाड प्यार ना प्रदान करना है आज व्यस्तता कि जिंदगी में अभिभावकों के पास अपने बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण समय नहीं है इसीलिए बच्चे जल्दी किसी के प्रति आकर्षित हो जाते हैं।
डॉ मुकेश कुमार श्रीवास्तव प्रधानाचार्य गवर्नमेंट इंटर कॉलेज चकिया ने कहा कि किशोरावस्था में विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण एक प्राकृतिक प्रक्रिया है यदि समय रहते उन्हें उचित मार्गदर्शन एवं परामर्श नहीं मिलता है तो वे घर एवं समाज के मानकों के विपरीत कदम उठाने से भी नहीं हिचकते ।
दिल्ली से चलकर आए प्रत्यक्ष भारत के प्रमुख संपादक शशिधर शुक्ला ने कहा कि फिल्मों का इस विषय पर गहरा प्रभाव है सभी फिल्मों में लगभग प्रेम विवाह को बढ़ा चढ़ाकर करके दिखाया जाता है जिसका युवा मन पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है
कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर मनोज कुमार तिवारी ने किया तथा अतिथियों का स्वागत एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ अजय तिवारी ने किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉ अविजय श्रीवास्तव, डॉ अमित तिवारी सुनीता तिवारी अनुराग तिवारी धर्मेंद्र सिंह डॉक्टर मनीष मिश्रा ने अपने विचार व्यक्त किए।

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