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उरई

बीएसए दफ्तर में उलट पुलट का ढर्रा थमने का नहीं ले रहा नाम

0 किस शिक्षक का वेतनमान मिलेगा यह लिपिक की कृपा पर निर्भर
0 तीन चक्रों की जांच के बाद ही वेतनमान हो पाता स्वीकृत

सत्येन्द्र सिंह राजावत
उरई (जालौन)। जनपद के बीएसए दफ्तर में उलट पुलट का ढर्रा कब थमेगा इस बारे में कोई भी शिक्षक नेता दावा नहीं कर सकता। हैरानी की बात तो यह है कि परिषदीय विद्यालयों में पदस्थ शिक्षकों का चयन वेतनमान की पत्रावली तीन स्तरीय जांच के बाद ही स्वीकृति होती है। फिर नजराना की मांग पूरी न होने पर स्वीकृति पत्रावली को निरस्त करने में संबंधित लिपिक पल भर की देरी नहीं लगाता। कार्यालय में मानो यह एक परंपरा सी बन गयी है। तो ऐसे मामलों से बेसिक शिक्षा अधिकारी भी संबंधित लिपिकों पर कार्यवाही अमल में न लेकर उन्हें अभयदान देने के तरीके खोज निकालते हैं।
कार्यालय सूत्रों की मानें तो किसी भी शिक्षक का चयन वेतनमान की पत्रावली संबंधित लिपिक के द्वारा तैयार की जाती है इसके बाद खंड शिक्षाधिकारी के परीक्षणोपरांत उसे बीएसए के पास भेजी है जहां से उसे वित्त एवं लेखाधिकारी के पास भेज दिया जाता है फिर वह पत्रावली संबंधित लिपिक के पास आ जाती है। इतनी प्रक्रियायें पूर्ण होने के बाद जब चयन वेतनमान मिलने का नंबर आता है तो नजराना की डिमांड होती है यदि किसी शिक्षक ने उसे पूरा कर दिया तो उसकी सौ गलती माफ हो जाती है और यदि किसी शिक्षक ने नजराना से इंकार किया तो उसकी पत्रावली को निरस्त कर दिया जाता है। ऐसा ही प्रकरण उरई नगर क्षेत्र में पदस्थ शिक्षिका के मामले से जुड़ा हुआ है। संबंधित शिक्षिका से जब संबंधित लिपिक ने नजराना मांगा तो उसने भ्रष्टाचार की एक सीडी बनाकर बीएसए को दे दी ताकि जनराना मांगने वाले लिपिक पर विभागीय कार्यवाही अमल में लायी जा सके। लेकिन शिक्षिका का यह कदम ही उसके लिए घातक साबित हुआ। नजराना मांगने वाले लिपिक पर तो बीएसए ने कोई कार्यवाही नहीं की लेकिन शिक्षिका की पत्रावली निरस्त कर उसे चयन वेतनमान से बंचित कर दिया गया। हैरानी की बात तो यह है कि बीएसए दफ्तर में उलट पुलट की जो परंपरा चल रही है उसमें सैकड़ों ऐसे उदाहरण है जिसमें शिक्षकों की वेतनवृद्धि रुकने के बाद भी उनको चयन वेतनमान व पदोन्नति से उपकृत करने का काम किया गया। अब ऐसे चर्चित मामलों में बेसिक शिक्षाधिकारी क्या कदम उठायेंगे यह तो समय ही बतायेगा।

सैकड़ों शिक्षकों की फाइलें दफ्तर में खा रही धूल

उरई। बेसिक शिक्षाधिकारी दफ्तर में अवैधानिक तरीके से शिक्षकों के रोके गये वेतन के चलते उनके द्वारा समय से स्पष्टीकण भी कार्यालय में दिये जो आज तक अनिस्तारित बने हुये हैं। बताया जाता है कि दफ्तर में भ्रष्टाचार का कांकस इतना सक्रिय है कि वह सही गलत व लगत को सही करने के लिये विख्यात हो चुका है। ऐसे अनिस्तारित प्रकरणों पर कब कार्यवाही अमल में लायी जायेगी इसका जबाब किसी के भी पास नहीं रहता।

कई चक्रों की वार्ता भी रही बेनतीजा

उरई। परिषदीय विद्यालयों में पद स्थापित अनेकों शिक्षकों के प्रकरण लंबित बने हुये हैं जिन पर अनेकों बार प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय नेता महेंद्र भाटिया के नेतृत्व में कई चक्रों की वार्ता हुई लेकिन इसके बाद भी मामले का कोई सार्थक परिणाम नहीं निकला। ऐसे लंबित प्रकरणों का समाधान कब तक होगा इसका सही सही जबाब तो बीएसए में निहित है लेकिन यदि वह गंभीरता दिखाये तभी संभव होगा।

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