News India Express
ललितपुर

आजादी के 74 वर्षों के बाद भी भारतीय संविधान अक्षुण्ण, जीवंत और सतत क्रियाशील बना हुआ है- विशाल जैन

 

0बुंदेलखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के तत्वाधान में संविधान दिवस पर ऑनलाइन विचार गोष्ठी का आयोजन।

अभय प्रताप सिंह

ललितपुर। बुंदेलखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के तत्वाधान में भारतीय संविधान दिवस की 71 वीं वर्षगांठ पर गूगलमीट के माध्यम से विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें जिला प्रवक्ता विशाल जैन पवा ने कहा आजादी के 74 वर्षों के बाद भी भारतीय संविधान अक्षुण्ण, जीवंत और सतत क्रियाशील बना हुआ है। भारतीय संविधान को संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को ग्रहण किया था और इसे 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था। भारतीय संविधान दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान है जो तत्त्वों और मूल भावना के नजरिए से अद्वितीय है। मूल रूप से भारतीय संविधान में कुल 395 अनुच्छेद 22 भागों में विभाजित और आठ अनुसूचियां थीं, लेकिन विभिन्न संशोधनों के परिणामस्वरूप वर्तमान में इसमें कुल 448 अनुच्छेद 25 भागों में विभाजित और 12 अनुसूचियां हैं। इसके साथ ही इसमें पांच परिशिष्ट भी जोड़े गए हैं, जो पहले नहीं थे। भारतीय संविधान का मसौदा तैयार करने वाली समिति की स्थापना 29 अगस्त 1947 को हुई थी। डॉ. भीमराव आंबेडकर को इस समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। यही कारण है कि डॉ. आंबेडकर को संविधान का निर्माता भी कहा जाता है। भारत में संविधान के निर्माण का श्रेय मुख्यतः संविधान सभा को दिया जाता है। जिसमें 284 सदस्यों ने 24 जनवरी 1950 को दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे। इसे पारित करने में दो साल, 11 महीने और 18 दिन लगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मनोहर सिंह बुंदेला ने कहा संविधान के तीसरे भाग में छह मौलिक अधिकारों का वर्णन किया गया है। वस्तुतः मौलिक अधिकार का मुख्य उद्देश्य राजनीतिक लोकतंत्र की भावना को प्रोत्साहन देना है। यह एक प्रकार से कार्यपालिका और विधायिका के मनमाने कानूनों पर निरोधक की तरह कार्य करता है। मौलिक अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में इन्हें न्यायालय के माध्यम से लागू किया जा सकता है। इसके अलावा भारतीय संविधान की धर्मनिरपेक्षता को भी इसकी प्रमुख विशेषता माना जाता है। महामंत्री गजराज सिंह परमार ने कहा धर्मनिरपेक्ष होने के कारण भारत में किसी एक धर्म को विशेष मान्यता नहीं दी गई है। भारतीय संविधान की प्रस्तावना भारत के संविधान की प्रस्तावना को दुनिया में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इसे अमेरिका के संविधान से प्रभावित माना जाता है। भारत के संविधान की प्रस्तावना यह कहती है कि संविधान की शक्ति सीधे तौर पर जनता में निहित है। भारत का संविधान देश का सर्वोच्च कानून है। यह सरकार के मौलिक राजनीतिक सिद्धांतों, प्रक्रियाओं, प्रथाओं, अधिकारों, शक्तियों और कर्त्तव्यों का निर्धारण करता है। संयुक्त महामंत्री अंकित जैन चौधरी ने कहा उल्लेखनीय है कि वर्ष 1976 में 42वें संशोधन के माध्यम से संविधान की प्रस्तावना में ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द जोड़ा गया था। सर्वोच्च न्यायालय संविधान का अंतिम व्याख्याकर्ता या अर्थविवेचनकर्ता है। सर्वोच्च न्यायालय ही संविधान में निहित प्रावधानों और उसमें उपयोग की गई शब्दावली के अर्थ और निहितार्थ के विषय में अंतिम कथन प्रस्तुत कर सकता है। वरिष्ठ उपाध्यक्ष अज़ाद सिंह बघेल ने कहा संसद जिन कानूनों को पारित करती है उन्हें आसानी से लागू किया जा सकता है और उतनी ही आसानी से उन्हें निरस्त भी किया जा सकता है जबकि संविधान की प्रकृति कानून से काफी अलग होती है। संविधान का निर्माण भविष्य को ध्यान में रखकर किया जाता है और उसे निरस्त करना अपेक्षाकृत काफी कठिन होता है। मीडिया प्रभारी राजेंद्र सिंह यादव ने कहा सर्वोच्च न्यायालय ने ऐसे कई फैसले सुनाए हैं जिनमें व्यक्ति के अधिकारों को मान्यता देकर सामाजिक परिवर्तन के युग की शुरुआत की गई है। प्रांतीय सह प्रवक्ता वीर दुबे ने कहा प्राकृतिक अवस्था जहां मनुष्य को दो ही अधिकार प्राप्त हैं, पहला- अपने जीवन की रक्षा का अधिकार और दूसरा- अपने जीवन की रक्षा के लिए कुछ भी करने का अधिकार की परिस्थितियों से बेहतर सामाजिक प्रगति के क्रम में देखा गया। अन्य वक्ताओं ने भी भारतीय संविधान के महत्व पर प्रकाश डाला एवं विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में सर्वसमावेशी, समतामूलक, मानवीय मूल्यों एवं अंत्योदय की भावना से पूरित संविधान प्रदान करने वाले हुतात्माओं को कोटिशः नमन किया। इस मौके पर उपाध्यक्ष सुरेंद्र पाल सिंह यादव, कोषाध्यक्ष राम प्रकाश तिवारी, संगठन मंत्री रवि कुमार वर्मा, प्रचार मंत्री सुरेश कुमार निरंजन, अमित कुमार जैन महरौनी, राजेंद्र सिंह परमार बार, पुष्पेन्द्र सिंह यादव, प्रमोद कुमार नायक मडावरा, श्रीमती किरन शिवहरे तालबेहट, राजेश निरंजन, अरिहंत जैन महरौनी आदि मौजूद रहे।

Related posts

पूर्व प्रधानमंत्री को कांग्रेसियों ने दी श्रद्धांजलि

newsindiaexpress

बच्चों को न भेजे बाहर, घर में दे उनका साथ

newsindiaexpress

दरोगा के खिलाफ दिए जांच के आदेश

newsindiaexpress