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उरई

गजब दो वर्ष पूर्व निर्मित पार्क बीडीओ की कायाकल्प योजना में हो गया शामिल?

0 ब्लाक प्रमुख की सहभागिता को लेकर भी उठने लगी उंगली
0 फर्जी विकास कार्यों में फिफ्टी-फिफ्टी का खेल तो नहीं

सत्येन्द्र सिंह राजावत
उरई (जालौन)। कदौरा क्षेत्र पंचायत दफ्तर में विकास कार्यों के नाम पर गुपचुप तरीके से कायाकल्प योजना तैयार की गयी है जिसमें पूर्व के वर्षों में कराये गये कार्यों को शामिल कर उनका जीर्णोद्धार कराना शामिल है। इसी में बीडीओ कार्यालय में दो वर्ष पूर्व निर्मित कराये गये पार्क को भी कायाकल्प योजना में शामिल कर उस पर 1 लाख 75 हजार रुपए खर्च किये जायेंगे। इस बारे में क्षेत्रीय लोग भी अब यह कहते सुने जा रहे हैं कि बीडीओ कार्यालय की ओर से कायाकल्प योजना में फिफ्टी-फिफ्टी का खेल खेला जा रहा है। और ऐसे मामलों में कथित रूप से स्वयं ब्लाक प्रमुख विजय निस्बां की भी सहभागिता हो सकती है।
उल्लेखनीय हो कि विकासखंड कदौरा के बीडीओ अतिरंजन सिंह व ब्लाक प्रमुख विजय कुशवाहा है जिनका कार्यकाल 16 मार्च को समाप्त होगा। यह तो सब रूटीन व्यवस्था है। लेकिन जिस तरह से क्षेत्र पंचायत कदौरा कार्यालय द्वारा कार्यालय परिसर में ही दो वर्ष पूर्व लाखों रुपये की लागत से एक पार्क का निर्माण कराया गया था। उस दौरान उसका उद्घाटन भी निवर्तमान सीडीओ द्वारा कराया गया था। इसी दौरान बीडीओ दफ्तर द्वारा निकलवायी गयी निविदाओं में उक्त पार्क को भी कायाकल्प योजना में शामिल कर उस पर 1 लाख 75 हजार रुपए खर्च करने का खांका तैयार कर लिया गया। इसके अलावा भी कई ऐसे मामले में संज्ञान में आ चुके हैं जिनके कायाकल्प में लाखों रुपए का बजट ठिकाने लगाया जा रहा है। ग्रामीणांचल के विकास के लिये बीडीसी सदस्यों द्वारा जिस मंशा से विजय कुशवाहा का समर्थन कर उनको ब्लाक प्रमुख की कुर्सी पर बैठाया गया था साथ ही काफी समय से बीडीओ का दायित्व संभाल रहे अतिरंजन सिंह ने इतनी बड़ी चूक कैसे हो गयी कि उनके कार्यालय द्वारा पूर्व के वर्षों में कराये जा चुके कार्यों की निविदायें प्रकाशित कर उन्हें कायाकल्प योजना में शामिल कर लिया गया। अच्छा यह होता शासन द्वारा जिस मंशा से ग्रामीणांचल के विकास हेतु करोड़ों का बजट दिया जाता है उससे ऐसे स्थानों पर विकास कार्य कराये जाते जहां आज तक विकास कार्य नहीं कराये गये तो निश्चित रूप से इसका लाभ भी ग्रामीणों को लंबे समय तक मिलता और उनका आवागमन भी सुगम होता। लेकिन विकासखंड कदौरा के जिम्मेदारों ने कायाकल्प योजना लांच कर खुद का कायाकल्प करने की योजना बना डाली। इसका जीता जागता उदाहरण ब्लाक परिसर में स्थित वह पार्क है जिसका निर्माण दो वर्ष पूर्व कराया गया था। लेकिन अब उस पर 1 लाख 75 हजार का बजट खर्च करने की कौन सी आवश्यकता आन पड़ी थी। क्या वास्तव में उस दौरान पार्क का निर्माण आधा अधूरा ही हुआ था। चलो मान लिया कि पार्क का निर्माण आधा अधूरा हुआ था लेकिन उक्त पार्क का उद्घाटन भी तो सीडीओ द्वारा किया गया था। ऐसे एक नहीं अनेकों कार्य हैं जिनको कायाकल्प योजना में शामिल कर विकास कार्यों के नाम पर गोलमाल का खेल खेला गया। जनहित में ऐसे फर्जीबाड़े के विकास कार्यों की उच्च स्तरीय जांच करायी जाये और जो भी जिम्मेदार दोषी हों उनके विरुद्ध ठोस कार्यवाही अमल में लायी जाए ताकि जमीनी स्तर पर ग्रामीणांचल में विकास कराये जा सके।
फोटो परिचय—
दो वर्ष पूर्व निर्मित कराया गया पार्क।

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