Home उरई चुनावी चक्कलस और महामारी की भेंट चढी जनपद में गेहूं खरीद

चुनावी चक्कलस और महामारी की भेंट चढी जनपद में गेहूं खरीद

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0 खरीद केन्द्रों पर मजाक साबित हो रहे सरकारी इंतजामात
0 फसलें न बिचने से किसानों की परेशानियों में होने लगा इजाफा

सत्येन्द्र सिंह राजावत
उरई (जालौन)। अप्रत्याशित कोरोना महामारी की आपदा के बाद बीच में यकायक उभरकर सामने आयी चुनावी चक्कलस अब किसानों पर भारी पडती प्रतीत होने लगी है बीते कुछ अरसे से देखा जा रहा है कि जहां एक ओर जनजीवन की अस्थिरता सामने आने लगी है तो वहीं सरकारी व्यवस्थायें भी इससे अछूती नही रही मसलन इन दिनों जनपद में सरकारी और गैर सरकारी स्तर पर होने वाली गेहूं खरीद का मामला लगभग ध्वस्त होता जा रहा है जिससने अब किसानों की चिंतायें बढा दी है। सूत्रों की माने तो गेहूं केन्द्रों पर सरकारी नुमाइंदों की अनदेखी के चलते व्यवस्थायें मजाक साबित हो रही है।
हर साल जिलें में गेहूं खरीद को लेकर शासन के निर्देशों के तहत प्रशासन दृारा गेंहूं खरीद केन्द्र बनायें जाते है ताकि अधिक से अधिक किसानों की फसलों की खरीद निश्चित समय पर करायी जा सकें लेकिन जिस तरह से यहां जनपद में गेंहू खरीद का मामला अव्यवस्थाओं की भेट चढा हुआ है बताया जाता है कि इन दिनों अधिकांश खरीद केन्द्रों पर जिस तरह से अव्यवस्थायें देखने को मिल रही है उससे साफ प्रतीत होता है कि सरकारी मशीनरी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाहन करने में सजग प्रतीत नही होती हालाकि जानकारों की माने तो कुछ दिनों से तो आलम यह है कि अधिकांश केन्द्रों पर सन्नाटा पसरा हुआ है फिलहाल जो भी हो लेकिन इतना साफ है कि गेहूं खरीद की यही स्थिति रही तो जिलें कें किसनों के सामने आर्थिक संकट गहरा सकता है। गौरतलब हो जिलें की अधिकांश आबादी कृर्षि प्रधान व्यवस्था का हिस्सा है किसानों के लिये तो उनकी फसलों के उत्पादन से ही उनकी सभी व्यवस्थायें संचालित होती है फिर चाहे वह रोजमर्रा की जरूरतें हो या फिर अन्य सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वाहन खेती किसानी की आय ही उनकें जीविको पार्जन का मुख्य जरियां होती है ऐसे में फसलें समय पर न बेची जा सके तो उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खडा होना लाजिमी ही है बहरहाल प्रशासन को चाहियें कि वह किसानों की परेशानियों को देखते हुये गेहूं खरीद केन्द्रों कें संचालन की व्यवस्थाओं को दुरूस्त करायें ताकि उन्हें राहत मिल सके।