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Featured - कदौरा - 4 weeks ago

गांव में रोजगार न मिलने से प्रवासी मजदूरों के चूल्हे ठंडे

0 रोजगार देने के दावे हवा में उड़ा रहे जिम्मेदार अधिकारी
0 अब तक काम न मिलने से प्रवासी मजदूरों में दिखा आक्रोश

कदौरा (जालौन)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोरोना महामारी को देखते हुए सभी जिले के अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि अन्य प्रदेशों में मजदूरी करने गए प्रवासियो के लौट कर आने पर उनको गांव में मनरेगा के तहत रोजगार दिया जाए ताकि उनको परिवार के भरण पोषण में किसी प्रकार की तकलीफ न हो। जबकि सच्चाई यह है कि लॉक डाउन लगने के बाद अधिकतर प्रवासी अपने अपने गांव लौट आए हैं और वो रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं ग्रामीणांे की माने तो गांव में लगभग एक सैकड़ा से प्रवासी मजदूर अन्य प्रदेशों व भट्टों से आए हैं। जिनको आए हुए लगभग एक माह हो गया है लेकिन अभी तक उनको रोजगार नही मिला है जो रोजगार न मिलने के कारण परेशान है। जबकि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत रोजगार देने का आदेश शासन ने दिया है लेकिन गांव में तैनात अधिकारी व कर्मचारी अधिकारियों को गुमराह कर रहे हैं। ब्लॉक क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्रामो में मनरेगा कार्य शुरू न होने प्रवासी पलायन करने की बात कह रहे हैं।
मजदूर बोले हमारी भी सुनो सरकार
प्रकाश निषाद का कहना है कि वह पत्नी रामवती व बच्चों के साथ मथुरा जिले के रूपनगर में स्थित भट्टे पर मजदूरी करता था कोरोना महामारी के चलते भट्टा संचालक ने काम बन्द करवा दिया जिससे अप्रैल माह में वह गांव लौट आया जब से बेरोजगार है। गांव में रोजगार न मिलने से परेशान हैं कच्चा मकान में सोमवार रात्रि हुई बारिश से पानी भर गया है रहने की भी जगह नही है रोजगार के लिए कई बार प्रयास किया लेकिन नही मिला। अगर ऐसे ही रहा तो परिवार भुखमरी की कगार में पहुच जाएगा। जॉबकार्ड तो है लेकिन गांव में भी रोजगार नही मिल रहा है कैसे वह अपना व परिवार का पेट पाले। गांव लाखन कहते हैं कि वह अपनी पत्नी छोटी पुत्र रामभजन व रामबली के साथ मथुरा के भट्टो पर मजदूरी करता था लॉक डाउन के चलते गांव लौट आया है मजदूरी की तलाश में आसपास के गांव व खदानों में भी मजदूरी देने के लिए कहा लेकिन नही मिली। उनका कहना है कि मजदूर अधिक है काम न होने की वजह से घर पर बेकार बैठे हैं कैसे परिवार का भरण पोषण करे समझ मे नही आ रहा है। गांव की भूरी कहती है कि वह अपनी पति अनिल भाई कामता व चार बच्चों के साथ इटावा स्थित भट्टों पर मजदूरी करती थी। लौटकर गांव में आये तो यहां पर भी रोजगार न मिलने से परेशान हैं पति बीमार रहता है किससे शिकायत करे कोई सुनता नही है। गांव के सुनील व महेश्वरीदीन ने बताया कि वह लोग सूरत में रह कर मजदूरी करते थे लॉक डाउन लगने पर वह लोग परिवार सहित 20 दिन पूर्व गांव लौट आए लेकिन गांव में रोजगार न मिलने से कर्ज लेकर भरण पोषण को मजबूर होना पड़ रहा है यहां पर अभी तक कोई पूछने नहीं आया। रोजगार न मिलने की वजह से भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं शिकायत भी की लेकिन किसी ने सुध नही ली। गांव में रोजगार न मिलने से वह लोग जल्द अब गांव से कही अन्य जगह मजदूरी के लिए जाएंगे। वहीं सुनील व महेश्वरीदीन की पत्नियों छोटी व महक ने बताया कि खाना बच्चों को क्या खिलाए चूल्हा भी जलना मुश्किल हो जाता है बच्चे भी भूख से बिलखते रहते हैं। गांव के बालकेश ने बताया कि वह मथुरा जिले के कोसी स्थित भट्टे में पत्नी रामकटोरी पुत्र राजकुमार के साथ मजदूरी करता था महामारी के चलते वह भी गांव लौट आया लेकिन कोई रोजगार न होने से परेशान हैं शिकायत के बाद भी सुनवाई नही होती है। जबकि सरकार प्रवासी मजदूरों को रोजगार देने के बड़े बड़े वायदे कर रही है हकीकत में सब कागजों पर ही अधिकारी खानापूरी करने में जुटे हैं।

डीएम से गांव में मजदूरी दिलाने की लगायंेगे गुहार

शिकायत करके थक चुके हैं कोई नहीं सुनता है गांव के चरण सिंह बबलू कहते हैं कि गांव में न तो कभी सचिव आता है और न अन्य कर्मचारी जब कभी आते भी है तो अधिकारियों को गुमराह करने के लिए फोटो खीच कर चले जाते हैं। अब जल्द ही जिलाधिकारी से मिलकर लापरवाह अधिकारियों की शिकायत करेंगे।
फोटो परिचय—-
प्रकाश निषाद पत्नी रामवती व बच्चों के साथ दरवाजे पर खड़ा।

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